Saturday, April 28, 2018

शाश्वत प्रेम

तुम्हारे 
जाने के बाद
मैंने 
आंख बंद कर
इक्कठी की 
हमारी सारी 
जीवन पर्यंत साथ 
रहने की बातें

फिर इतिहास में
ढूंढा सब
प्रेमियों को
जो 
अंतिम क्षण
तक 
प्रेम में जीने
की बातें 
कह चुके थे

समन भेजा 
फिर
शक्सपेर के 
रोमियो जूलिएट
मजनू, लैला, 
हीर रांझा
सोहनी महिवाल 
और बाकी
किरदारों को
उनके
बयान लिए और
दर्ज की 
उनकी प्रेम की
कसमें
गवाही
के तौर पे

फिर इन सब को
जोड़ कर मैंने
"शाश्वत प्रेम" 
नामक एक
ग्रंथ लिखा

और उसके पहले
पन्ने पे गढ़ दिए 
ये शब्द
"काल्पनिक हैं
इस किताब के सभी पात्र
और उनकी बातें
जिनका वास्तविकता 
से कोई संबध नही।".


अचानक

अचानक से
हथियार हाथ से 
फिसल गए

मकसद, जोश 
और मंज़िल
दूर गूंजते
शब्द 
बन गए

ये बेबस,
कमज़ोर और 
सम्मोहित होने
का मेरा
पहला अनुभव था

मुझे जानने वालों
के लिए एक
आविश्वसनीय 
अफवाह जो 
उनके सामने 
घटी थी

इस वाकये को
अब सालों हुए
और सालों हुए
तुम्हारे पीछे चलते

आज अचानक
इक सवाल
मन में
उठा है
अगर बुरा न लगे 
तो बताओ ज़रा

कितनी दूर जाने के
बाद फ़िर
पलटोगे और
फ़िर मुझे देख कर
मुस्कुराओगे।

सब तो आते हैं

सब तो आते हैं
तुम क्यू नहीं आते
एक भी बार

जाने अनजाने लोग
कब के बिछड़े यार
उल जलूल बातें
उलटे सीधे ख्याल
सब तो आते हैं
तुम क्यूँ नहीं आते
एक भी बार

न रुकता सा सूरज
न चलती सी रात
बेमौसम की बारिश
पतझड़ और बहार
सब तो आते हैं
तुम क्यूं नहीं आते
एक भी बार

साँझ भी आती,
भोर भी आती
ख़्वाब हैं आते
याद है आती
दोस्त हैं आते
आते दुश्मन
और कभी कभी तो
आ जाते नाराज़ रिश्तेदार
रोज़ ही यूँ चला आता है
बड़बोला सा अखबार

देखो सोच के
सोच के देखो न इक बार
सब आते हैं
तुम क्यूँ नहीं आते
एक भी बार

Saturday, January 27, 2018

गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण 
के सिद्धान्त के बारे में
बात कर सकते हो,
समझ सकते हो
समझा सकते हो
किताब खोल के
बंद कमरे में बैठ के
घंटों चर्चा करके

मगर अगर
अनुभव करना है
गुरुत्वाकर्षण को

तो 
लेने होंगे वो सारे 
कदम जहां से लौटना
मुमकिन है और
पहुँचना होगा
किसी पहाड़ की
चोटी के 
आखिरी कोने तक

फिर 
देखना होगा पृथ्बी की
आंखों में आंखें डाल के

और फिर अगर हिम्मत है
तो उठाना होगा 
आखिरी वो कदम
जिसके बाद
वापसी संभव नही

तब तुम
समझ पाओगे
गुरुत्वाकर्षण को

महसूस कर पाओगे
कितनी तीव्रता से
धरती चाहती है
तुम्हे पास बुलाना
और जानोगे
उसकी चाह तुमसे 
मिलने की
गहरी है किसी भी
माँ के मोह से

बिल्कुल ऐसे
 जैसे कोई
प्रेमिका सदियों से
इंतेज़ार कर रही थी
तुम्हारे इस अंतिम कदम का

जैसे उसका विरह का
दर्द पार कर चुका था
सब हदें
और बिना कुछ बोले
नैन बिछाये
राह तकती थी
कि कब तुम में
आएगी हिम्मत 
वो आखिरी कदम उठाने की

वो आखिरी कदम
जिसके बाद 
बात 
तुम्हारे हाथ से 
निकल जायेगी
वो आखिरी कदम
जिसके बाद तुम
असहाय हो जाओगे
जिसके बाद वापस
लौटना मुमकिन न होगा

प्रेम ऐसा ही होना चाहिए
समझे?
तुम मुझे अब कुछ
मत समझाओ

मैंने प्रेम पृथ्वी
से सीखा है
और मैं आखिरी कदम 
उठा चुका हूँ।

Saturday, August 12, 2017

इस सदी की सबसे दुखद घटना - १२ अगस्त २०१७

1947 में बटवारे के वक़्त
लाखों मारे गए
करोड़ों बेघर हुए
शामिल थे मेरे पूर्वज
रो देती थी दादी 
सुनाते हुए वो वाक्या
मैं बचपन में ही 
बड़ा हो गया था

इतिहास में दर्ज़ है
हिटलर के जुल्मों का 
हिसाब 
जो दहला देता है
कठोर से कठोर हृदय को
कहानियां उन दिनों की
आज भी कंपा देती है
भीतर से

अमेरिका के लिटल बॉय
ने एक क्षण में कई लाख
लोग पिघला के हवा कर दिए
हिरोशिमा में
इससे डरावना भी कुछ
हो सकता है क्या?

भोपाल ट्रेजडी
1984
गुजरात
फिलिस्तीन
सीरिया 
इराक
अफगानिस्तान
पिताजी का निधन 

हर मौके पे
आंखों का बस 
नम होते होते रह जाना

कितना दूर हूँ यथार्थ से

इस सदी की सबसे दुखद घटना, 
जिसने बदल कर 
रख दिया जीवन
इस सदी की उस सबसे दुखद
घटना में कोई नही मरा
न चोट लगी किसी शरीर को

बस एक चुप्पी
जो बरसों तक गूंजती रही।

Thursday, July 27, 2017

और फिर अंत में प्रतीक्षा

और फिर शब्द 
हर कहानी
हर गीत 
हर रोज़ 
हर बात
बस एक सवाल 
क्यूँ?

दिन पर दिन 
रात पर रात 
साल पर साल 
किसलिए?

और फ़िर प्रेम 
न दुनिया 
न जवाब 
न कहानी 
न सवाल 
बस तुम 

दिन पर दिन 
रात पर रात 
साल पर साल 
कब तक? 

फिर सन्नाटा 
हल्का अँधेरा 
न प्रेम 
न सवाल 
न तुम 
न जवाब  
सिर्फ मैं 

दिन पर दिन 
रात पर रात 
साल पर साल 
कैसे?

और फ़िर?

और फिर 
एक हल्की मुस्कान 
धुंधले चेहरे 
यात्रा, चलना 
दौड़ना, थकना
गिरना, उठना 
 
दिन पर दिन 
रात पर रात 
साल पर साल 

और फिर अंत में प्रतीक्षा 



Sunday, January 22, 2017

बदनाम ~ २२ जनवरी २०१७

कितना मुश्किल होता है, 

बनाना एक घोंसला, 

ससे भी मुश्किल होता है, 

उसमे घर बसाना

और फिर देना उसमे अंडे।

बेहद मुश्किल होता होगा
उसी घोंसले को बारिश में
हिलते और फिर टूटते देखना।

कितनी अजीब बात है
मुझे पसंद है वो एक चिड़िया
जिसने अपने घोंसले को
खुद ही पेड़ से गिरा दिया
और उड़ गयी दूर आकाश में....