Friday, February 20, 2015

चलना


(Kolkata 2008 Feb)

जाते जाते वो ज़िन्दगी जीने के फल्सफे बता रहा था
सुन के उसकी बातें दिल जीने से और घबरा रहा था

सोच कर कभी बेबाक हँसता हूँ, कभी उदास होता हूँ
कल तलक वो ताउम्र साथ चलने की कसमे खा रहा था

तेरी अलविदा सुन कर कबसे रुका है उसी मुकाम पर
जाने कितनी सदियों से वक्त बस चला जा रहा था

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