(Kolkata 2008 Feb)
सुन के उसकी बातें दिल जीने से और घबरा रहा था
सोच कर कभी बेबाक हँसता हूँ, कभी उदास होता हूँ
कल तलक वो ताउम्र साथ चलने की कसमे खा रहा था
तेरी अलविदा सुन कर कबसे रुका है उसी मुकाम पर
जाने कितनी सदियों से वक्त बस चला जा रहा था
जो कुछ कह नहीं पाया वो सब इनमे कह दिया
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