Friday, February 20, 2015

ख़ोज


(कन्याकुमारी जाते हुए 2006 Feb)

"इन बादलों से हमारे बहुत पुराने नातें हैं,
होता हैं जब भी दिल उदास, ये बरस जाते हैं.

हम लफ़्ज़ों में कब कह पाए अपना हाल-ऐ-दिल,
जाने ये कैसे हमारी खामोशी भी समझ जाते हैं.

कुछ तो इन जैसा अब हममें भी नज़र आता है,
न इन्हे ख़बर कहा से आए, न हमें पता किधर को जाते हैं."

No comments: