Friday, March 20, 2015

तन्हा


(2005, बैंगलोर में अकेले रातें सड़कों पर बाइक के साथ बिताये वक़्त की पैदाइश)


नज़र नही आ रहा आज आईने में अक्स मेरा,
बता ऐ दिल कब इतना तन्हा जाना था हमें.

यूँ किए इतने सितम हम पर ज़माने ने,
दिल है तो दुखेगा शायद समझाना था हमें .

बुतों से हुई उस दिन से दुश्मनी हमारी,
जिस दिन से उसने खुदा माना था हमे.

वक्त ने काट डाले हैं पर तो जमीं पर हैं ,
नही तो आसमान छूकर आना था हमे.

पूछते हो क्यों होश खो के मुस्कुराता हूँ,
पीने से पहले क्या-क्या भुलाना था हमे

एक कफ़न और दो गज ज़मीन चाहिए बस,
गुज़रा वो वक्त जब सारा जहाँ पाना था हमे.

आज फिर उंडेली है कागज पर स्याही मैंने,
आज फिर एक ख्वाब दफनाना था हमे.

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