(Aug 2006, कालेज में हुई एक बहस के बाद)
हर शख्स इस शहर का क्यूँ मुझको डरता है,
पूछा नही मैंने, फ़िर भी मुझे रास्ता दिखाता है.
कुछ राहें जंगल से होकर भी मंजिल को जाती है
मगर पक्की सड़क पर ही हर कोई चलता जाता है
पहले बरसात के साथ मिटटी की खुशबू भी लाता था
कुछ साल हुए बादल अब बस पानी बरसाने आता है
हर शख्स इस शहर का क्यूँ मुझको डरता है,
पूछा नही मैंने, फ़िर भी मुझे रास्ता दिखाता है.
कुछ राहें जंगल से होकर भी मंजिल को जाती है
मगर पक्की सड़क पर ही हर कोई चलता जाता है
पहले बरसात के साथ मिटटी की खुशबू भी लाता था
कुछ साल हुए बादल अब बस पानी बरसाने आता है
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